NAVIC क्या है ?
आपका स्मार्टफोन अब अमेरिकी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) की जगह स्वदेशी नैविगेशन विथ इंडियन कॉन्स्टलेशन (NavIC) यानी नाविक से लैस होगा। आने वाली जनवरी से इसकी शुरुआत हो सकती है। केंद्र सरकार ने सभी मोबाइल निर्माता कंपनियों से इसे एक जनवरी 2023 से लागू करने के लिए कहा है
नाविक एक पूर्णत: स्वदेशी नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम है। इसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा विकसित किया गया है।
नाविक आठ उपग्रहों की मदद से काम करता है। ये सिस्टम हिन्दुस्तान के पूरे भू-भाग को कवर करता है।
GPS और NAVIC में अंतर
GPS और नाविक सिस्टम में मुख्य अंतर दोनों द्वारा कवर होने वाले क्षेत्र में है। GPS पूरी पृथ्वी को कवर करता है। इसके उपग्रह दिन में दो बार पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। वहीं, नाविक भारत और उसके आसपास के इलाके में इस्तेमाल के लिए है।
GPS की तरह कुछ और नेविगेशन सिस्टम दुनिया में इस्तेमाल होते हैं।
क्यूं जरूरी है
विदेशी उपग्रह प्रणालियों पर निर्भरता को दूर करने के लिए सरकार नाविक सिस्टम विकसित कर रही है। खासतौर पर रणनीतिक क्षेत्रों में निर्भरता कम करना इसका उद्देश्य है। जीपीएस और ग्लोनास जैसे विदेशी सिस्टम पर हमेशा भरोसा करना रणनीतिक तौर पर सही नहीं हो सकता है। क्योंकि, ये सभी उन देशों की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा संचालित होते हैं।
चुनौतियां
इसरो के वैज्ञानिकों ने जहाँ एक कठिन चुनौती को पूरा करते हुए GPS की अमेरिकी व्यवस्था को चुनौती देने वाला भारतीय सिस्टम तैयार तो कर लिया है, लेकिन इसका तुरंत आम लोगों तक पहुँचना आसान नहीं है।
NavIC को आम लोगों के उपयोग में लाए जाने वाले उपकरणों में आने में लंबा समय लग सकता है क्योंकि इसके लिये मोबाइल फोन से ले कर नेवीगेशन सिस्टम तक के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में बदलाव करना होगा।
